एक्सक्लूसिव

जीवन में ‘न’ कहने की भी आदत डालिए

ऐसा कई बार होता है कि हम करना कुछ चाहते हैं और करते कुछ और ही हैं। इसके पीछे वजह ये है कि हम न चाहते हुए भी तमाम काम करते ही रहते हैं। अगर आप भी अपनी इच्छा के विरुद्ध जीवन जी रहे हैं तो आप उसे बस झेल रहे हैं। जैसे ही आपको ये अहसास हो जाए कि आप किसी व्यक्ति या आस पास की परिस्थितियों को झेल रहे हैं तो तुरंत न करना शुरू कर दें।

जब मैं न करने को कहता हूं तो इसका ये मतलब कतई नहीं है कि आप अपने बॉस से विद्रोह करना शुरू कर दें या फिर परिवार वालों की हर खुशियों को न की तलवार से काटते जाएं। न का मतलब साफ है कि जो आपके लिए अच्छा न हो उसमें फंसे रहने के बजाए उस व्यवस्था से अलग हो जाना ही बेहतर।

अगर कोई व्यवस्था आपको व्यक्तिगत, नौकरी या कारोबारी क्षेत्र में खुशी देने के बजाए आपकी सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक उपलब्धि में बाधा बन जाए। साथ ही समझौतों की सारी हदें पार हो गई हों फिर भी कोई सूरत न दिखाई दे रही हो तो ऐसी जगह लटके रहने से कोई फायदा नहीं है।

ऐसी परिस्थितियों में माहौल को भांपने के बाद भविष्य को लेकर एक रणनीति बनाएं और मौका देखकर अपनी पुरानी परिस्थितों के साथ और रहने के लिए करना शुरू कर दें। ऐसा करते ही आप लचर जीवन से आज़ाद होकर अपने सपनों की दुनिया नई ताजगी के साथ जीना शुरु कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *