राष्ट्रीय वैश्विक

अपने बॉडीगार्ड की प्रेमिका के साथ सोने लगे थे आचार्य रजनीश

आचार्य रजनीश के बॉडीगार्ड का ये खुलासा उनके भक्तों की नींद छीन लेगा। ये हैरान करने वाला कबूलनामा है जो आचार्य रजनीश उर्फ ओशो की मृत्यु के 28 साल बाद सामने आया है। ऑनलाइन प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स की एक डाक्यूमेंट्री सीरीज में ओशो के बाडीगार्ड रहे ह्यूग मिल्ल ने ये चौकाने वाली जानकारी दी है। ह्यूग मिल्ल एडिनबरा के रहने वाले हैं। उन्होंने सालों रजनीश के साथ काम किया। ओशो की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उनके ही कंधों पर थी।

 

ह्यूग रजनीश के करीबी लोगों में से एक थे
ह्यूग मिल्ल के मुताबिक ओशो ने उन्हें कठिन श्रम करने के लिए काफी दूर भेज दिया। इस दौरान वे मिल्ल की गर्डफ्रेंड के साथ सोते रहे। ओशो के आश्रम में सेक्स की पूरी स्वतंत्रता थी। किसी एक के साथ जीवन भर का रिश्ता निभाने जैसा कोई बंधन नही था। मगर मिल्ल के मुताबिक ओशो ने इस सिद्धांत की आड़ मे उनकी गर्ल फ्रेंड को ही उनसे दूर कर दिया।
ह्यूग साल 1973 में जन्मे थे। वे ज्ञान की तलाश में भारत आए। ये समय रजनीश के अभ्युदय का था। आचार्य रजनीश के प्रति लोगों की दीवानगी सीमाएं तोड़ रही थी। उनके भक्त जिंदगी की सारी तड़क-भड़क छोड़कर उनके करीब आ रहे थे। वे दिन भर कठोर श्रम करते। रात डारमेट्री में बिताते। मगर रजनीश के प्रति उनकी भक्ति कम होने का नाम नही ले रही थी। मिल्ल ने रजनीश के ऑडियो कैसेट सुने। वे उनसे बेहद प्रभावित हुए। मगर मिल्ल का ये शुरूआती रुझान वक्त के बीतते बीतते ढलने लगा। उन्होंने रजनीश पर एक किताब भी लिखी जिसका टाइटल था, द गॉड दैट फेल्ड। यानि ईश्वर जो नाकाम रहा। पुस्तक के शीर्षक से साफ है कि मिल्ल रजनीश को भगवान मानते थे। मगर ये भगवान उनकी अपेक्षाओं पर खरा नही उतरा और इस कदर नाकाम रहा कि मिल्ल को ये तमाम ब्योरे एक किताब की शक्ल में सामने रखने पड़े।
मिल्ल ने पाया कि ओशो की एक विशेष आदत थी। वे सुबह के चार बजे उठकर अपनी शिष्याओं को विशेष दर्शन दिया करते थे। मिल्ल को सबसे झटका तब लगा जब उनके ओशो के सानिध्य में आने के 18 महीनो के भीतर ही ओशो ने उनकी गर्लफ्रेंड के साथ सोना शुरू कर दिया। मिल्ल अपने गुरू के इस कदम से वाकिफ हो चले थे मगर उनकी आस्था उन्हें प्रतिवाद करने से रोक रही थी। उन्होंने इस घटनाक्रम को भी सकारात्मक रुप से लेने की कोशिश की। उन्हें लगा कि ये जो हो रहा है, ये भी उनके अच्छे के लिए ही हो रहा है। वे ओशो की भक्ति में इस कदर चूर थे कि उन्होंने इसे भी गुरू की माया ही समझा।
ओशो ने ंमिल्ल को 400 मील दूर भेज दिया था। वे अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने को तड़प रहे थे मगर गुरू की अवहेलना नही कर सकते थे। जब वे लौटकर आए तो हालात से समझौता कर चुके थे। इस बीच उन्हें ओशो की निजी सचिव मां योग लक्ष्मी का बॉडीगार्ड बना दिया गया। हुआ यूं कि एक रोज एक महिला ने दर्शन न मिल पाने से क्षुब्ध होकर मां योग लक्ष्मी पर हमला कर दिया। इसके बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ह्यूग मिल्ल को दे दी गई। इस बीच मिल्ल मां आनंद शीला के संपर्क में आए। मां आनंद शीला ओशो की बेहद करीबी थीं। वे भारतीय थीं मगर उनका पालन पोषण अमेरिका में हुआ था। ह्यूग मिल्ल और मां आनंद शीला की नजदीकियां बढ़ीं। दोनो एक दूसरे के काफी करीब आ गए। ये बात मां आनंद शीला के पति को बिल्कुल पसंद नही आई। उन्होंने ओशो से इसकी शिकायत की और ह्यूग मिल्ल को मां आनंद शीला से दूर करने के लिए कहा। इसके बाद दोनो के रिश्तों में खासी खटास आ गई और मां आनंद शीला ह्यूग मिल्ल से उखड़ी उखड़ी रहने लगीं।
ओशो के बॉडीगार्ड ह्यूग मिल्ल और मां आनंद शीला के बीच अमेरिका के ओरगेन आश्रम को लेकर भी ठन गई। मिल्ल ओरगेन में आश्रम बनाने के खिलाफ थे। यहां की अथॉरिटीज भी नियम कानून के पालन न किए जाने को लेकर खासी नाराज थीं। मगर मां आनंद शीला अड़ी हुई थीं। उनकी खासी चलती थी। रजनीश उनसे खासा प्रभावित रहते थे। ह्यूग ने साल 1982 में ओशो का आश्रम छोड़ दिया। वे इस कदम मानसिक तौर पर परेशान हो चुके थे कि उन्हें काउंसलिंग की मदद भी लेनी पड़ी। ह्ययूग मिल्ल की ये आपबीती एक भगवान के ऊंचाई से गिरने और भक्तों की आस्था के चकनाचूर होने की जीती जागती बानगी है।

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