राष्ट्रीय विशेष

युगों पहले समुद्र से निकला अमृत। यहां आकर पीते हैं लोग!

कुम्भ का अर्थ है घड़ा। पर ये कुम्हार का बनाया घड़ा नही है। समुद्र मंथन की कहानी प्रसिद्ध है। मंथन के आखिर में अमृत कलश निकला। इसे छीनने के लिए संग्राम हुआ। देव-दानव के बीच। इसी छीना झपटी में कलश से अमृत गिरा।

कुछ बूंदे धरती पर गिरीं। जहां  गिरीं, वहीं कुंभ का आयोजन होता है। कुंभ मिथकों से भरा पूरा है। एक मिथक महान वैद्य धनवंतरी का जिक्र करता है। वे कलश लेकर जा रहे थे। रास्त में वे इन 4 जगहों पर रूके। वहीं पर कुंभ का आयोजन होता है।

एक मिथक गरूण, इंद्र और मोहनी का भी है। वे तीनो कलश लेकर जा रहे थे। उन्होंने चार जगहों पर कलश छलका दिया। यहीं कुंभ का आयोजन होता है।

 

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