राष्ट्रीय विशेष वैश्विक

यहां आने पर अपने दादे-परदादों के निशान मिलेंगे! यकीन न हो, आजमा लीजिए!!

कुम्भ आज का नही। सदियों पुराना है। कुंभ विश्व का सबसे बड़ा मेला है। सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव। इतनी तादाद में भक्त कहीं नही पहुंचते।

चीनी यात्री ह्वेनसांग छठीं सदी में भारत आया। उसने कुम्भ की गरिमा जानी। वो दंग रह गया। उसने कुंभ का ज़िक्र भी किया। ह्वेनसांग ने अपनी किताब में एक नाम लिया है। ये नाम शिलादित्य का है। शिलादित्य सम्राट हर्ष को कहते थे।

छठीं शताब्दी में सम्राट हर्ष ने कुंभ का आयोजित किया। मान्यता यह भी है आदि शंकराचार्य ने कुंभ को प्रतिष्ठा दी। उन्होँने 8 वीं शताब्दी में कुंभ की परंपरा प्रवाहित की। कुंभ मेला चार जगहों पर होता है। ये जगहें हैं। हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन।

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