तस्वीरों में राष्ट्रीय वैश्विक

भारी पड़ सकता है चर्च में कंफेशन, कुछ भी कुबूल करने से पहले इसे जरूर पढ़ें!

कन्फेशन यानी अपनी गलती कुबूल लेना। ये तय कर लेना कि अब गलती नही होगी। ईसाई धर्म में गलती कुबूल करने को ही कंफेशन कहते हैं। कोई भी व्यक्ति चर्च में अपनी गलती कुबूल कर सकता है। इस दौरान उसके साथ सिर्फ पादरी होता है। और होता है उसका ईश्वर। तीसरा कोई नही। मगर इस कुबूलनामे का इकलौता इंसानी गवाह पादरी फिर जो करता है, उसे सोचकर इंसानियत शर्मसार हो जाएगी।

ये हर जगह नही हो रहा। मगर कुछ चर्चों में ऐसा ही हुआ है। इन जगहों पर पादरी की मौजूदगी में अपना गुनाह कुबूल करने वाली औरतों का यौन शोषण किया गया। कैथोलिक और ऑर्थोडॉक्स चर्च में ये कंफेशन की प्रथा आम है। मगर अब कंफेशन की आड़ में यौन शोषण का अपराध रिपोर्ट हो रहा है। उदाहरण है केरल। यहां के कोट्टायम में एक महिला ने एक के बाद एक चार पादरियों पर आरोप लगाया। यौन शोषण का गंभीर आरोप।  
 
चर्च में कन्फेशन की प्रक्रिया का बाइबिल में जिक्र मिलता है। इसके दो चरण हैं। पहला चरण में उस डर को समझना होता है जो पाप के अहसास के साथ पैदा होता है। दूसरे चरण में गलती का एहसास होता है और ऐसी मान्यता है कि ईश्वर इस अहसास के साथ ही उस पाप की माफी दे देता है। यहीं पर पादरी का रोल भी सामने आता है। उसे ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता है। इसीलिए उसकी मौजूदगी में ही पापों के प्रायश्चित का विधान है।
 
सिर्फ भारत ही नही, विश्व भर से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अमेरिका में यह संख्या सैकड़ों में पहुंच चुकी है। पंजाब के जालंधर में जो हुआ, उसे सुनकर इंसानियत शर्मसार हो जाएगी। पीड़िता के मुताबिक उसने कन्फ़ेशन के दौरान सब कुछ कह दिया। उसके राज बांटने पर उस पादरी को मौका मिल गया जो मौके पर मौजूद था। उसने उसका यौन शोषण किया। उसे धमकियां दीं।
 
एक पर्दे की आड़ में गुनाह!
 
चर्च में कन्फेशन के वास्ते एक नियत जगह होती है। यहां एक परदा होता है। यही परदा पादरी और कंफेशन करने वाले व्यक्ति के बीच होता है। इसी परदे के आगे व्यक्ति कंफेशन करता है। कंफेशन की शर्त है कि उस जगह पर इन दोनों व्यक्तियों के अतिरिक्त और कोई वहां मौजूद नहीं होगा।  कंफेशन करने वाला व्यक्ति इस बात का यकीन करता है कि पादरी उस कंफेशन को अपने तक रखेगा। ये कंफेशन बस पादरी और ईश्वर के बीच रहेगा। कहीं नही जाएगा। कहीं लीक नही होगा। इसी विश्वास का प्रयोग इस तरह के पादरी ब्लैकमेलिंग करने के लिए करते हैं और यौन उत्पीड़न को अंजाम देते हैं।
 

10 साल के हुए नही कि कंफेशन शुरू

 
10 साल से कम उम्र बच्चों के लिए कन्फेशन मान्य नही है। ये माना जाता है कि वे भोले होते हैं। उन्हें सही-गलत का कोई अहसास नहीं होता है। वे भूल कर सकते हैं, करते भी हैं मगर ये अपराध नही होता है।  इसी तरह से मानसिक रूप से अशक्त व्यक्तियों के लिए भी कंफेशन का कोई अर्थ नही, उन्हें इनसे दूर रखा जाता है।

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