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नेपाल की पीठ में महिला कैसे बन गई शंकराचार्य! भड़क उठे पुरूष शंकराचार्य!!

नेपाल की पीठ में महिला शंकराचार्य की नियुक्ति की गई है। यह पशुपति नाथ पीठ है। इस पर शंकराचार्यों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। द्वारका-शारदापीठ एवं ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अन्य क्षेत्रों के समान राजनीति में तो जा सकती हैं, किंतु शंकराचार्य की संस्था की प्रतिनिधि नहीं बन सकतीं। 

उन्होंने नेपाल में पशुपतिनाथ पीठ के वजूद पर सवाल उठाए। अखिल भारतीय विद्वत परिषद की जमकर आलोचना की।उनके मुताबिक, ‘अखिल भारतीय विद्वत परिषद के नाम की संस्था नकली शंकराचार्य गढ़ रही है। इसने पिछले दिनों नेपाल में पशुपतिनाथ के नाम से एक नई पीठ ही बना डाली। जबकि, इस तरह की कोई पीठ नहीं रही है।’

उन्होंने इस पीठ पर महिला शंकराचार्य की नियुक्ति पर भी आंख भौं तरेरी। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, ‘यहां एक महिला को शंकराचार्य बना दिया गया। जबकि कोई भी महिला शंकराचार्य पद पर आसीन नहीं हो सकती। ऐसा विधान स्वयं आदि शंकराचार्य द्वारा तय किया गया है।’

उन्होंने कहा, ‘ये ठीक है कि महिलाएं प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सांसद, विधायक बनें, यह अच्छी बात है। परंतु, कम से कम धर्माचार्यों को तो छोड़ दें। धर्म के यह पद स्त्री के लिए नहीं हैं। उन्होंने इस बात को सिद्ध करने के लिए कई उदाहरण रखे। जो संविधान एक देश में लागू होता है, वह उसी रूप में दूसरे देश में लागू नहीं हो सकता। उसी प्रकार, किसी को शंकराचार्य बना देने की व्यवस्था मान्य नहीं होगी। शंकराचार्य ने शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और इससे होने वाले नुकसान को लेकर भी आगाह किया।

उन्होंने इसकी भी व्याख्या करते हुए कहा ‘शनि मंदिर में स्त्री का प्रवेश वर्जित है, क्योंकि शनि क्रूर ग्रह है। उसकी दृष्टि यदि स्त्री पर पड़ी तो उसे नुकसान हो सकता है, लेकिन समानता के आधार पर कहा जाता है कि स्त्री भी शनि की पूजा करेगी। अब इससे स्त्री की जो हानि होगी, उससे उसे कौन बचाएगा?’

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