राष्ट्रीय विशेष

कुंभ भी चलता है! हर तीन साल में एक बार!!

कुंभ का आधार विक्रम संवत है। उसी कैलेंडर से इसकी ज्योतिषीय गणना की जाती है। इसमें बृहस्पति, सूर्य एवं चंद्र की स्थितियां बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। हर तीन साल के अंतराल पर कुंभ का स्थान बदलता है।

इस तरह 12 वर्ष बाद कुंभ लौटता है। जिस स्थान पर एक बार हुआ। फिर वहां 12 वर्ष बाद होगा। कुंभ एक क्रम से होता है। पहले हरिद्वार, फिर प्रयाग, नासिक और फिर उज्जैन। ये कुम्भ का क्रम है।

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